गायत्री साधक मौनी बाबा की गायत्री साधक मौनी बाबा की Reviewed by कहानीकार on September 25, 2017 Rating: 5
उसे मन ही मन हंसी आ गई- बर्फ को भला किसी ने पकड़ा है. अपनी सोच है, अपना जीने का ढंग, पर वरुण तो ख़ूब रंगने लगे हैं इस रंग में. उसे कभी...
रिटर्न गिफ्ट रिटर्न गिफ्ट Reviewed by कहानीकार on September 25, 2017 Rating: 5
यदि हमारी जैसी पढ़ी-लिखी और कामकाजी महिलाएं भी ऐसी वर्जनाओं के सामने घुटने टेक देंगी, तो बाकी की महिलाओं का क्या होगा? हमसे अच्छी, तो स...
एक वादा अपने आप से एक वादा अपने आप से Reviewed by कहानीकार on September 25, 2017 Rating: 5
‘कितनी अजीब-सी उम्र होती है किशोरावस्था की. मासूमियत की दीवार भेद एक अनोखी नई दुनिया भीतर घुसपैठ करने लगती है. भावनाएं डगमगाने लगती है...
अपने शहर में.. अपने शहर में.. Reviewed by कहानीकार on September 25, 2017 Rating: 5
उन्हें लगा जैसे लोग कैलेंडर में छपे किसी देवता के चित्र को पूजते हैं और नया साल आते ही उस कैलेंडर को हटा देते हैं. उनका भी हाल कैलें...
हम आपके हैं कौन? हम आपके हैं कौन? Reviewed by कहानीकार on September 25, 2017 Rating: 5
ताई मां के स्वर में एक कसक थी. वे सोचने लगीं कि जब फेसबुक दुनियाभर के दोस्तों को मिलाने का काम कर रहा है, तो घर के मुख्य सदस्य या मु...
फेसबुक डॉट कॉम फेसबुक डॉट कॉम Reviewed by कहानीकार on September 25, 2017 Rating: 5
उस मीठी बारिश में तुम्हारी और नेहा की ज़िंदगियां भीगकर उस ख़ूबसूरत नीड़ को आबाद कर देंगी, जिसका पक्षी जेठ की भरी दोपहरी को ही जीवन मानकर ...
जीवन की परिभाषा जीवन की परिभाषा Reviewed by कहानीकार on September 25, 2017 Rating: 5